Gas Cylinder Rate: हर महीने की पहली तारीख को रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की नजरें टिकी रहती हैं, और आज सुबह यानी महीने की शुरुआत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की नई दरें जारी कर दी गई हैं. 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमतें इस बार स्थिर रखी गई हैं, जिससे आम जनता को महंगाई के बीच थोड़ी राहत मिली है
14.2 किलो घरेलू सिलेंडर की नई कीमतें
तेल कंपनियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस महीने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में कोई खास बढ़ोतरी या कटौती नहीं की गई है.
| शहर | 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत |
|---|---|
| दिल्ली | ₹853.00 |
| मुंबई | ₹852.50 |
| कोलकाता | ₹875.50 |
| चेन्नई | ₹871.00 |
दाम स्थिर होने से आम लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, हालांकि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते बदलाव संभव है.
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें कैसे तय होती हैं?
भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों द्वारा तय की जाती हैं. ये कंपनियां कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों के आधार पर कीमतें निर्धारित करती हैं:
- अंतरराष्ट्रीय एलपीजी दरें
- कच्चे तेल की कीमत
- डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट
- परिवहन लागत और टैक्स
घरेलू सिलेंडर की कीमतें आमतौर पर स्थिर रखी जाती हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों के दामों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है
महंगाई के बीच राहत की खबर
इस समय जब दूध, सब्जियों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, रसोई गैस की कीमत स्थिर रहना घर के बजट को संतुलित रखने में मददगार साबित हो सकता है.
ग्रामीण भारत में भी अब एलपीजी ईंधन का मुख्य स्रोत बन चुका है, खासकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन मिलने के बाद इसकी पहुंच तेजी से बढ़ी है.
अलग-अलग राज्यों में अलग क्यों होती है कीमत?
आपने अक्सर देखा होगा कि एक ही गैस सिलेंडर की कीमत अलग-अलग शहरों में अलग होती है. इसका प्रमुख कारण है:
- स्थानीय टैक्स व्यवस्था
- परिवहन और वितरण लागत
- स्टेट लेवल चार्ज और सब्सिडी
जिन राज्यों में डिपो या रिफाइनरी पास होती है, वहां कीमत अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी क्षेत्रों में लागत ज्यादा होने के कारण कीमतें अधिक होती हैं.
सब्सिडी का क्या है सिस्टम?
सरकार की ओर से घरेलू गैस उपभोक्ताओं को सब्सिडी भी दी जाती है, जो सिलेंडर की बुकिंग के बाद सीधे ग्राहक के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है.
- यह राशि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर घटती-बढ़ती रहती है
- सरकार की कोशिश रहती है कि बढ़ती कीमतों के असर को सब्सिडी के ज़रिए कम किया जा सके
कुछ ग्राहकों को सब्सिडी नहीं भी मिलती, खासकर वे जिनकी आय तय सीमा से अधिक है या जिन्होंने स्वेच्छा से सब्सिडी त्याग दी है.
आगे क्या हो सकता है?
गैस सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह वैश्विक बाजार की स्थितियों पर निर्भर करती हैं. अगर:
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है
- डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है
तो आने वाले समय में सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है.
हालांकि सरकार के पास सब्सिडी जैसे उपाय हैं, जिनका इस्तेमाल करके वह जनता पर पड़ने वाले बोझ को कम कर सकती है.






