Education Survey: हरियाणा सरकार ने 1 से 19 जनवरी 2026 तक राज्यभर में “आउट ऑफ स्कूल” बच्चों की पहचान के लिए विशेष सर्वे कराने की घोषणा की है. यह अभियान शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत चलाया जाएगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 6 से 14 वर्ष तथा 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और सभी को मुख्यधारा के स्कूल सिस्टम से जोड़ा जाए.
घर-घर जाकर की जाएगी बच्चों की पहचान
शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, यह सर्वे स्कूल स्तर से लेकर जिला स्तर तक चार चरणों में किया जाएगा. सबसे पहले 1 से 9 जनवरी 2026 के बीच प्रत्येक स्कूल का स्टाफ घर-घर जाकर सर्वे करेगा और उन बच्चों की पहचान करेगा जो किसी कारणवश स्कूल से बाहर हैं या कभी स्कूल नहीं गए.
सर्वे में इन बच्चों पर रहेगा विशेष ध्यान
इस अभियान के तहत उन बच्चों पर विशेष फोकस किया जाएगा जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों से आते हैं. जिनमें शामिल हैं:
- अनुसूचित जाति और जनजातियों से जुड़े बच्चे
- प्रवासी परिवारों के बच्चे
- सड़क पर रहने वाले, भिक्षावृत्ति करने वाले और अनाथ बच्चे
- घुमंतू और विमुक्त जनजातियों से आने वाले बच्चे
सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाई जाए, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो.
सर्वे में चूक पर तय होगी जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यदि सर्वे के बाद भी कोई बच्चा छूटता है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल मुखिया या शिक्षा अधिकारी की होगी. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी बच्चे सूचीबद्ध हों और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो.
चार चरणों में होगा सर्वे
इस राज्यव्यापी सर्वेक्षण को चार चरणों में आयोजित किया जाएगा, ताकि आंकड़ों को व्यवस्थित और सटीक रूप से एकत्र किया जा सके.
पहला चरण (1 से 9 जनवरी 2026):
स्कूल स्तर पर शिक्षक और स्टाफ घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और बच्चों की पहचान करेंगे.
दूसरा चरण (12 और 13 जनवरी 2026):
क्लस्टर स्तर पर पहले चरण से एकत्र किए गए आंकड़ों को संकलित और जांचा जाएगा.
तीसरा चरण:
ब्लॉक स्तर पर डाटा की समीक्षा और सत्यापन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर योजना तैयार की जा सके.
चौथा चरण:
जिला स्तर पर सभी आंकड़ों का अंतिम एकत्रीकरण और रिपोर्टिंग की जाएगी, जिससे राज्य सरकार को नीति निर्धारण में सहायता मिल सके.
शिक्षा को लेकर हरियाणा सरकार की प्रतिबद्धता
हरियाणा सरकार की यह पहल “सबको शिक्षा, सबको अधिकार” की सोच को मजबूत करती है. राज्य पहले से ही “स्कूल चलो अभियान”, बाल शिक्षा उत्सव, और ड्रॉपआउट रिडक्शन प्रोग्राम्स जैसे प्रयासों के जरिए स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है.
क्यों जरूरी है यह सर्वे?
भारत में अब भी लाखों बच्चे किसी न किसी वजह से स्कूल नहीं जा पाते, जिनके पीछे आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारण हो सकते हैं. इस सर्वे के जरिए सरकार:
- शिक्षा से वंचित बच्चों की सही संख्या जान सकेगी
- नीतियों और योजनाओं को ज़मीनी हकीकत के अनुसार बना सकेगी
- विशेष समूहों के लिए लक्षित योजनाएं लागू कर सकेगी






