देसी शराब और अंग्रेजी शराब में असली अंतर, इस कारण ज्यादा महंगी होती है अंग्रेजी शराब Liquor Difference

Liquor Difference: शराब का नाम सामने आते ही अलग-अलग ब्रांड के नाम सामने आ जाते हैं. शराब पीने वालों ने देसी शराब और अंग्रेजी शराब दोनों का नाम तो आपने खूब सुना होगा. अगर जिन लोगों की शराब पीने की ...

Sara Eisen

Liquor Difference: शराब का नाम सामने आते ही अलग-अलग ब्रांड के नाम सामने आ जाते हैं. शराब पीने वालों ने देसी शराब और अंग्रेजी शराब दोनों का नाम तो आपने खूब सुना होगा. अगर जिन लोगों की शराब पीने की आदत है, वो देसी शराब पीना पसंद नहीं करते हैं, जबकि अंग्रेजी शराब पीना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपको दोनों में फर्क पता है? आज हम आपको इस आर्टिकल में इनके बीच का अंतर बताएंगे.

देसी और अंग्रेजी शराबमें अंतर

देसी और अंग्रेजी शराब के बीच सबसे बड़ा फर्क उनके स्वाद, पैकिंग, ब्रांडिंग और कीमत में होता है, जबकि इनका निर्माण प्रक्रिया (Meking Process) लगभग एक जैसी होती है. दोनों ही शराबें डिस्टिल्ड स्पिरिट से तैयार की जाती हैं. हैरानी की बात यह है कि देसी शराब बनाने वाली कंपनियां ही वही स्पिरिट अंग्रेजी शराब कंपनियों को बेचती हैं.

स्वाद और फ्लेवर का फर्क सबसे अहम

अंग्रेजी शराब में फ्लेवर और एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, जिससे उसका स्वाद सुगंधित और आकर्षक बनता है. वहीं देसी शराब में किसी तरह का फ्लेवर या गंध नहीं मिलाया जाता. इसका स्वाद पूरी तरह उस मूल कच्चे पदार्थ पर निर्भर करता है, जिससे वह बनी होती है.

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एक जैसा प्रोसेस, लेकिन कीमत में क्यों फर्क?

यह जानना दिलचस्प है कि दोनों शराबों के निर्माण की प्रक्रिया लगभग समान होती है, फिर भी अंग्रेजी शराब की कीमत देसी के मुकाबले कई गुना अधिक होती है. इसका कारण सिर्फ फ्लेवर और पैकेजिंग नहीं, बल्कि इससे जुड़ी पूरी लागत संरचना (Cost Structure) है.

उत्पादन लागत

देसी शराब सिंगल डिस्टिल्ड होती है और इसे कम लागत वाले शीरे (molasses) से तैयार किया जाता है. इसमें अशुद्धियां अधिक हो सकती हैं, जिससे प्रोसेसिंग की लागत कम आती है. इसके विपरीत, अंग्रेजी शराब कई बार डिस्टिल की जाती है, जिससे उसमें हाई लेवल की शुद्धता लाई जाती है. साथ ही इसमें महंगे फ्लेवर, एडिटिव्स और उच्च गुणवत्ता की ब्लेंडिंग सामग्री का इस्तेमाल होता है, जो इसकी उत्पादन लागत बढ़ा देते हैं.

पैकिंग और ब्रांडिंग

देसी शराब की पैकिंग बेहद सामान्य और सस्ती होती है – जैसे प्लास्टिक की बोतल या पॉलिथीन पाउच. इसमें ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर लगभग कोई खर्च नहीं होता. जबकि अंग्रेजी शराब की बोतलें कांच की, आकर्षक डिजाइन वाली होती हैं, जिन पर लेबलिंग, कॉर्क सील और मार्केटिंग में भारी खर्च किया जाता है. यही कारण है कि अंग्रेजी शराब की डिजिटल और फिजिकल प्रेजेंटेशन बेहतर होती है.

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राज्य स्तर पर टैक्स सिस्टम का बड़ा प्रभाव

भारत में शराब की कीमतों पर सबसे बड़ा असर राज्य सरकारों के टैक्स सिस्टम का पड़ता है. अंग्रेजी शराब पर देसी शराब की तुलना में बहुत ज्यादा एक्साइज ड्यूटी और अन्य कर लगाए जाते हैं. हर राज्य अपने हिसाब से टैक्स तय करता है, इसलिए अलग-अलग राज्यों में एक ही ब्रांड की कीमत में बड़ा अंतर देखा जा सकता है.

उपभोक्ता पसंद भी बनाती है फर्क

देसी शराब को आमतौर पर कम आय वर्ग के लोग पीना पसंद करते हैं, जबकि अंग्रेजी शराब का उपभोग शहरी और उच्च आय वर्ग के लोग करते हैं. इसी वजह से कंपनियां अंग्रेजी शराब को एक ब्रांड वैल्यू के साथ पेश करती हैं, जबकि देसी शराब की मार्केटिंग बहुत सीमित होती है.

देसी और अंग्रेजी शराब में अंतर

मापदंडदेसी शराबअंग्रेजी शराब
निर्माण प्रक्रियासिंगल डिस्टिलमल्टीपल डिस्टिल
कच्चा मालशीरा (Molasses)शुद्ध स्पिरिट (High-grade spirit)
फ्लेवर और एडिटिवनहींहां, महंगे फ्लेवर और एडिटिव
पैकिंगसस्ती – प्लास्टिक/पाउचमहंगी – कांच की बोतल, लेबलिंग, सील
मार्केटिंग खर्चनगण्यअत्यधिक
टैक्स और शुल्ककमअधिक
टारगेट उपभोक्ताग्रामीण/कम आय वर्गशहरी/उच्च आय वर्ग

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Sara Eisen is an experienced author and journalist with 8 years of expertise in covering finance, business, and global markets. Known for her sharp analysis and engaging writing, she provides readers with clear insights into complex economic and industry trends.

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